Monthly Archive: January 2013

अरमानो की महक…!!!

आज बड़ी दिन बाद बचते बचाते निकल आई धुप हमारे गलियारे में…और अजीब हरकत करने लगती हमारी कलम अचानक जैसे कोई छोटे बच्चे का हाथ पकड़ के कुछ लिखाना चाह रहा हो…!!

यादो के दरीचों से देखो आज
कैसे छन रही महीन किरने…!!

बयार भाग रही उरस के.
वादों से भरी अनसुलझी गुच्छी…!!

पक रहा कही डेऊढ़ी तक आ..
गयी किसीके अरमानो की महक…!!

आखों में चिपकाए ख्वाब आज..
ताप रहा चेहरा मधिम आंच पर…!!

जा पोछ ले लाल हो गया चेहरा फिर ..
पूछुंगा कितने अरमान ख़ाक किया…!!

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ओस के गरारे…!!!

नहीं रोया आसमान भूख से…
खाना बनने में देरी हो गयी थी…!!!

बिछौना लगा था तभी लगता हैं
आज पहले ही सो गया होगा…!!!

जल्दी मत उठाना सुबह उसको…
कौन करवाएगा उससे ओस के गरारे…!!!

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चाँद का जन्मदिन…

जन्मदिन था चाँद का…सब आये थे…पर फिर भी मुह फुलाए खड़ा था…चाँद ऐसा क्यूँ…!!

आज तो जन्मदिन था चाँद का..
सितारों से सजी थी महफ़िल भी…!!

बिजली कड़क रही की फलक पे..
गिरे सहमे चाँद के बाजुओ में…!!

हवाए फूंक रही रंग बिरंगे गुब्बारे…
सितारे भी कतार में खड़े झालर बने…!!

रुका हैं चाँद किसी और के लिए…
नहीं आ पाएगा वो काट केक तू…

बड़ी सर्दी पड गयी हैं आज देख…
धरा ने ओढ़ लिया अब्रो का कम्बल…!!

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रात सोना भूल गयी…!!!

रात सोना भूल गयी…!!!

कहा सुनी हो गयी फलक पर..
सब चले गए मुह फुलाए हुए…!!

तारे कम ही लिपटे थे देख..
अब्र मफलर बांधे चल दिए…!!
क्या माजरा था जान न पाया…
चाँद भी लाइट बुझा सो गया…!!
बड़ी देर से आँखे झुकाये…
पड़ा रहा टूटी खाटोले पे…!!
पर इसी कसमकस में देख..
आज रात ही सोना भूल गयी…!!
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Sinful Tree…!!!

Very backing dazz..!!

A Person clad the sinful trees with dazzling seven fruits..which now charming human…to recast the legend values in new flaunts…!!!
Nowadays person plucking away those attractive magnetic lust…hanging in their garden…!!!
Those disastrous seven are…wrath,greed,sloth,pride,lust,envy and gluttony…all of then only redirect…towards…ignorance,mistrust,arrogance…much more than that…me feeling myself surrounded by them…!!!

कान लगा कर सुन रहा था…
चट्टानों तले कराह रही आवाज़…!!!

एक अजन्मा बीज लेटा हैं…
धरती माँ के कोख में…!!!

पकड़ ले माँ कुछ देर और
वरना उप्पर लूट ले जाएंगे..

उसके अंग तक भी…!!!
कौड़ियो में बिक रहे अस्मत…

कुछ न बचेगा महाप्रलय में
आ गया शायद २०१२ वाला…!!!

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निशान खत्म…!!!

चलते चलते रुक गया एक मुकाम पर…खोज रहा हूँ कुछ पैरो की छाप पर…मिल नहीं रहे वे…मिटा दिया होगा हवायों ने सारे सबूत…अब उन गुनाहगारों खातिर सजा की अर्जी कहा तामिल कराऊ…किससे दरख्वास करूँ मेरी जिल्लतों भरी ज़िन्दगी को सवारने की…!!!

निशाँ खत्म हो गए अब..
यहाँ के बाद…!!!

चप्पल तो हैं मिट्टी सने
और तेरा अक्स भी हैं…
पर निशाँ गायब…!!!

ए आसमां तेरी खैर नहीं…
तूने ही निगला होगा…!!!

लौटा दे ला तुर्रंत…
वरना नोच लूँगा
तेरा चमकीला बटन…!!!

सांझ आने से पहले…
ही बिखर जाएंगे तेरे गौहर…!!!

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यादों के लिफाफे…!!!

बड़ी सादगी रहती किसी के लेटर की आजकल तो दूरभाष यन्त्र आ चूका हैं वरना लोग दिनों दिनों इन्तेजार में गुजारते की उनकी बेसब्री का आखिर क्या अंजाम होगा…शायद आप कुछ हम तक पहुछे थोडा पढ़िए फिर समझिये…आखिर हम सुना रहे एक लिफाफे की दास्ताँ..!!!

बड़ी शालीनता से चला आया..
यादों का लिफाफा…!!!

बैठा एक मठमैले थैले में छुपके ..
कहीं नजर न लगे..!!!

तभी लभेड़े मुहर की काजल
चेहरे पर पहचानो…!!!

कितने जुड़वे हैं उनके नाम
लिपटे हैं सीने से…!!!

लाखो सैयारे फॉगता लगता..
आया हैं मेरे पास …!!!

अब गले मिल ले जल्दी देख…
मुझसे रहा न जाता..!!!

काफी बेढंगा लग रहा तू आज..
भूल गया लिपटना भी…!!!

उफ़ तू तो बेजान हैं हमें लगा..
लिफाफे भी बोलते…!!!

पर पढना पड़ता चश्मा लगा के
वरना बहक जाते..!!!

हर वो दरीचे जहा से आवाज आती..
पकड़ो तो सही…!!!

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यादों के रुमाल..???

गोरखपुर में बारिश हो रही सोचा बड़ी रोज से कलम शांत हैं आज उसे भी मौका दूँ वरना नाराज हो जाएगा … अगर सोचिये आँख मिचौली हो रही हो आकाश में इस समय तो क्या मंजर हो आहा सोच के मजा आ जाता…!!!


अभी निशा अपने शबाब पर थी कि
लग गई नजर कुछ लफंगे अब्रों की..!!

गरज रहे उसके अगल बगल जैसे..
बड़ी देर से सहमी सी बैठ हैं डर के..!!

सितारा भी गिनती गिन रहा आँख मूंदे..
बादलों के साए में छुपा बैठा चाँद…!!

जरा देख हट गयी तेरे ऊपर से कवर
अब जा टिप मार दे वरना हार जाएगा..!!

लो रोने लगा चाँद हार के अब तो..
रोएंगे बादल भी उसे देख कर..!!

अब कौन ले आये यादों के रुमाल…???

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चाँद की डेट


आज चाँद भी जल्द चला आया…

सितारे भी जमाहियाँ लेते…!!

कोई डेट दिया होगा शाम का

तभी पूरा झिगोला पहना था..!!

काजल लगाकर आय कैसा

देख नजर ना लगे…!!

उतर गया झील में दबे पांव…
लहरों से गले मिलना था..

उफ़ बदल पकड़ ले रहे उसे बार बार…!!

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रोशन दानो

सम्मे के रोशन दानो से…छान के आती महीन धूप…!!
बरजो पर लगते ही देख…
छितरा जाती मानो कोई…मोती का हार टूटा हो…!!!
अब कौन बटोर के लाए उन्हें देख..
कैसे मुह फुलाए पालथीमार कर बैठ हैं…!!!

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