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Monthly Archive: April 2013

हेडफोन…

बस एक रंगीन टुकड़ा…
…सुबह ही आया
लुढ़कते लुढ़कते…!!

…अब नहीं आता वो…

वरना चला आता था…
….हर रोज़ जहाज
गलियारे मे क्रैश होने…!!

कानो मे आज भी…
…रोती बिलखती चीखे
गूँजा करती बेवक्त…!!

ज़रा आके हटा जा…
…सो गयी ज़िंदगी
हेडफोन लगा के…!!

~खामोशियाँ©

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छांव की शर्बत…

दो-चार
गुल तो मेरे
आगन मे
भी पड़े हैं…!!

लूह के
चाटे खाये
लाल गाल लिए…!!

तोड़ दूँ
तो मर जाये…
छोड़ दूँ
तो मर जाये…!!

दिन भर
गमला थामे..
दौड़ता रहता
इधर-उधर…!!

छांव की
शर्बत पिलाते…!!
अब कहाँ
मिल पाती
नींबू पानी शर्बत…

~खामोशियाँ©

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फूटबाल

हर रोज़….
साहिल पर बैठे…….

निहारता
एक गोल मटोल….
फूटबाल…
गिरता जाता 
मटमैले पाले मे…!!
कभी गुलमोहर की ओट लिए… 
झाँकता आखें छुपाए…!!
शब खेल रही आँख-मिचौली…
और पकड़ गया गोला…
अब जाना होगा तुझे….
कल फिर आना…!!

~खामोशियाँ©

1

ज़िंदगी का ज़िकसा:

टुकड़े मे टूटे
बिखरे इधर उधर…!!

कौन उठाए
कौन जुड़वाए…!!
सर पर पाँव
पाव पर पेट…!!
कितनी उलझी हैं
ज़िंदगी की गुत्थी…!!
उलट पुलट झांक रहे
यहाँ वहाँ टाँक रहे…!!
सब बिगड़ गया ए मौला
फिर से बनाउ क्या…!!

~खामोशियाँ©

3

दुपहरी:

दुपहरी वक़्त सेंकती
धरा तपता तावा लिए…!!

लूह के थपेड़े जला रहे
बार-बार बुझती अगीठी…!!
साँझ रोज़ चाली आती
थामे रंग बिरंगे आइस-क्रीम …!!
आज भी याद वो पश्मीना
शाल ओढे दरवाजा…
काट लिया पूरी सर्दी…!!
पसीने छूट रहे उसके…
शीशम रो रहा शायद…!!
खीच के देख ले करकराहट
जमी हैं उसकी सिसकियों मे…!!

~खामोशियाँ©

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उलझे मंझे

जिंदगी कभी ऐसी गूँज भी सुनाती हैं,
बशर को शायरों के चौबारे पहुंचाती हैं…!!!

कोई मोती लादे नयनो में झाँके तो,
कितने किस्से झलकियाँ दिखलाती हैं…!!

कभी बुलाती वो पीले पत्र ओढ़े,
तो कभी जेबों से सूखे नज्म खुलवाती हैं…!!

रात कुरेदता पुराने जख्मो को लिए,
सुबह बासी यादों के पुलाव सनवाती हैं…!!

देखते उड़कर कटे लुढ़कते उन पतंगों को,
ज़िन्दगी भी जाने कितने मंझे कटवाती हैं…!!

~खामोशियाँ©

2

सूरज

पक के गिरने

वाला ही था…
कि क्षितिज 
जेब मे रख लिया…!!

अब सुबह ही 

निकालेगा उसे…
टाँगने को 
फ़लक पर दुबारा…!!

कोई उठना 

जल्दी सुबह तो…
बताना 
कितना मीठा था वो…!!

~खामोशियाँ©

1

एक शाम चुरा लूँ…

बड़ा दूर चला आया हूँ…इस मझी हुई ज़िंदगी मे…कुछ लम्हे नोच कर बटुए मे रख लू…!!
एक शाम को ढलता सूरज…उसपे डोरे डालते लफंगे अब्र….क्या मनोहर दृश्य रहता…पर फुर्सत नहीं हमे की देख सके उनकी अठकेलियाँ…!!

बस चाहता हूँ…
वक़्त की डायरी से
चुरा लूँ एक शाम…!!
यादों की भींड से
बुला लूँ एक नाम…!!
वादो की ढ़ेबरी मे
माना लू एक जाम…!!
साजो की गगरी से
सजा लू एक पैगाम…!!
बस चाहता हूँ…

~खामोशियाँ©
0

आज कुछ उखड़ी उखड़ी हैं वो…

आज कुछ उखड़ी उखड़ी हैं वो…

न आँखों मे ख्वाब कोई…
न ख्वाबों मे रुवाब कोई …!!

न प्यार मे कशिश कोई…
न कशिश मे बंदिश कोई…!!

न नज़्म मे साज कोई…
न साज मे आवाज कोई…!!

न मौसम की मदहोसी कोई…
न मदहोसी मे बेहोसी कोई…!!

आज कुछ उखड़ी उखड़ी हैं वो….

~खामोशियाँ©

2

जिंदगी

एक चुल्लू भर
पानी दे…
भर लूँ जेबों मे…

सुना हैं…
जिंदगी मे
कांटे बहुत हैं…

निकाल ना सही…
कम से कम
रंग तो धो लूँगा…

~खामोशियाँ©

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