Monthly Archive: May 2013

ख्वाबो की शिकंजी

दुबके छुपके सहमे
सांसो मे
अचानक…!!

कैसे आ जाती
यादो की हिचकियाँ…!!

पानी नहीं अब..
ख्वाइस की सिल्ली
खुरुच बना
ख्वाबो की मीठी सिकंजी…!!

©खामोशियाँ

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रात

उफ़्फ़..
फ़लक ने तोड़ दी
चमचमाती बटन..!!

बस सितारे लटके हैं
औंधे झुलते
धागे पकड़े..
बयार रोक लो ए अब्र..!!
वरना गिर पड़ेंगे
ऊपर गर्म फ़ुहारे..!!
©खामोशियाँ
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गरमी…

इस तपतपाती
धरा पर
कोई इल्ज़ाम न डाल…!!

सूरज ने
एसिड लदी
बोतले उड़ेली है उसपे…!!
ज़रा छिड़्क
कमंडल खोल
दो चार बूंदे ए अब्र…!!
वरना पहुँच
जाएगी सागर
तो अक्स नहीं देख पाएगी…!!

©खामोशिया
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ज़िंदगी की कुल्हड़

थामे खाली
यादो के प्याले
हर्फ़ हर्फ़ घूमता हूँ.!!

लिए अकेले
वो मिट्टी शरीर
रोज़ रोज़ गूथता हूँ..!!

बिखरी पड़ी
ज़िंदगी की कुल्हड़
फूंक फूंक तराशता हूँ.!!

पकड़े बाज़ू
अन्श्को की चाय
किसको किसको पिलाता हूँ..!!

©खामोशियाँ

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खामोशियाँ

उमर बढ़ते हैं….
लोग गुजरते नहीं….
पलकों के ख्वाब…
यूंही टूटते नहीं….!!!

कितनी खामोशियाँ
लिए ज़ेब टहलते…
मर्ज की कुल्हड़ मे…
दवा पिरोते नहीं….!!!

कितने मंझो मे
उलझी ज़िंदगी अब…
बादल फटते जाते
पर बरसते नहीं….!!!

कुछ दूर मिलते
दो चट्टान एक दूजे से…
अंश्क सूखे रहते
झरने झरते नहीं….!!

©खामोशियाँ

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बेवफा…

तेरी बाहो मे..
कभी केवडे़ की खुश्बू…!!

तो कभी..
रूखे रेत से नहायी लूह…!!
बता तु बेवफ़ा नहीं..
तो और क्या है…!!
©खामोशियाँ
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आईना

देख धूप खिसकती…
छज्जो तलक आ गयी..!!

बालकनी मे लेटा लेटा आइना..
फ़्लैश मार चमक रहा..!!
उतार ले नक्श..
फ़िर मिले न मिले..!!
©खामोशियाँ
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बहेलिये…

उड़्ती
हुई खामोशी..
आ बैठी कंधो पर…!!

चल घोसलो तक
छोड़ दे…!!
कहीं फिर
ना पकड़ ले जाए…!!
वो ज़ुल्मी
बहेलिए…!!
©खामोशियाँ
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चमकती अठन्नी

ठुमक के चलते
बस्ता लादे…!!

ऊपर की पाकिट मे
धीरे से भर देती
चमकती अठन्नी..!!
आज कुछ ना
मिलेगा उससे..!!
पर एहसास तो रहेगा
ज़िंदा ताउम्र..!!

©खामोशियाँ

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मदर्स डे:

ज़रा गौर से देख…
सारे मदीने
यहीं ताकते हैं…!!

रहमतो को उनके
हर रोज़ आंकते हैं…!!
कभी कमी ना होती
आयतो की दर पे..!!
सुना है
माँ की पुतलियो से
भगवान झांकते हैं..!!
©खामोशियाँ
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