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Monthly Archive: June 2013

यादों की बरसात:

हो गयी फुरसत उसके चंद अल्फ़ाज़ों के बाद…
चिराग भी जलता रहा बैठे बरसातों के पास..!!!

चाँद को देख अब्रो की आँचल मे कैद….
सितारा रोता रहा बने के सीपों की सांस…!!!
डरे…सहमे…दुबके…छुपके…
लिपटा रहता रखे जाने कितने एहसास…!!!
यादों की चादर बिछा के सो गया इस तरह…
बयार ने उतार दिया उसके चेहरे का लिबास…!!

©खामोशियाँ
4

बेरोजगार

बेरोजगार
रोज़ भाव ढूंढता रहता…

बड़ी आस से किवाड़ खोलता…
कहीं कुछ मिले दांव उठाने को…!!

नज़्म की खोल से ऊपर तक..
यादें वादे मुंह छुपाती…!!

सुना हैं बारीक होते बटखरे…
चलो तोड़ तोड़ बेंच दूंगा…!!

सारे 24 कैरेट खरे
चमकते नींद के गोले…!!

अब इनसे बनती नहीं नींद की….!!

©खामोशियाँ

2

कुछ हुआ ही नहीं….!!

जगमगाते पीले आसमान के
कोरों से होकर…
आज भी सीधे
धंसते हैं तीखे तेवर..!!

जोर से चीखता बादल
मानो लग गयी फ़लक को
उधड़ गए हो महीन टांके…!!

बह रहा लहू
भीगे जा रहे सफ़ेद अब्र…
रो रहा कबसे
चुप ही नहीं होता….!!

और तुम कहते
कुछ हुआ ही नहीं….!!

©खामोशियाँ

3

उफ़्फ़ ज़िंदगी

मुझे जीने का आलम सीखा दी…
जिंदगी ना पूछ कितनी बार दगा दी…!!!

हर रोज़ जा ठहरते किसी सिग्नल पे…
ट्रेन आने से पहले ही फाटक गिरा दी….!!

कुछ पैंतरे मेरे भी चले उस रोज़…
बस पत्ते फेंटते गए और बेगम हटा दी…!!

अब कुछ ना रहा पहले जैसा…
बिना दलील लिए इतनी बड़ी सजा दी…!!

©खामोशियाँ

3

यून्ही…!!!

वक़्त की…
…सरगोशियो मे कहीं

मधिम आंच पर…
…पक रही थी दाल
जो एकाएक…
…आज सीटी मार कर
बाहर निकल गयी…!!!
©खामोशियाँ
5

गरमी

उफ़्फ़..
इस जलती गरमी मे
कोलतार उड़ेल रही नज़्म..!!

ख्वाबो की
सड़क बनने को तैयार खड़ी..!!
बस रुला दे
तो ज़रा मार दूँ
इन अंश्कों की छींटे..!!
©खामोशियाँ
1

काफिर

वक़्त बेवक़्त
चेहरा बदलता है..
दिल कागज़ी ठहरा
फ़िर भी धड़कता है..!!

उन राहो से
लोग कहाँ गुज़रते..
अब जहाँ
गुलिस्ता बदलता है..!!

जिगर वाले पाले
रखते ये रोग..
काफ़िर तो रोज़
ठिकाने बदलता है..!!

शहर ना अपना
ठहरा ना उनका..
तभी मिलने के
बहाने बदलता है..!!

©खामोशियाँ

1

वक़्त की ताबीज़

वक़्त की ताबीज़
गले बांधे घूमते रहे.
चलो कुछ ना सही
फ़कीर तो बन गए..!!

दुनिया वालो पर
कैसे कैसे ज़ुर्म किए.
किसमत की जगह
लकीर जो बन गए..!!

क़यामत की कहानी
किसे किसे सुनाए.
दिन सोये फ़िर रात
कबीर लो बन गए..!!

©खामोशियाँ

1

लफंगे अब्र

काश हम भी कोइ
गुल हुए होते..
बालो मे फँसकर
देश विदेश खोये होते..!!

वक़्त बेवक़्त तंग
न करते लफ़ंगे गम..
खुशी की मच्छर दानी
लगाये सोये होते..!!

दिन भर भौरो
साथ बिता के..
रोज खिलते
रोज बिखर रोए होते..!!

©खामोशियाँ
1

एहसास

करना हो एहसास इज़हार करके देखो…
बढ़ी हो प्यास प्यार करके देखो…!!

कितने पागल हैं लोग इस प्यार मे…
यकीन न हो चश्मा उतार के देखो…!!
कुछ दूरी पे मिल जाते सारे साये…
अधजली रूहों पर कपड़े चढ़ाके देखो…!!
हमारे साथ बैठती चादनी रात भर…
कभी फ़लक के चादर झाड़के देखो…!!
©खामोशियाँ
3
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