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कार्बन


एक
कार्बन रखकर

एहसासों को
गाढ़ा कर,

कुछ
सफ़ेद पन्ने पे
उभरेंगी तारीखें।

नज़र
का टीका
करके गोला मार देना।
आजकल
जमाना खराब है।

– मिश्रा राहुल

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3 Responses

  1. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, सियाचिन के परमवीर – नायब सूबेदार बाना सिंह – ब्लॉग बुलेटिन , मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है … सादर आभार !

  2. जय मां हाटेशवरी…
    आपने लिखा…
    कुछ लोगों ने ही पढ़ा…
    हम चाहते हैं कि इसे सभी पढ़ें…

    इस लिये दिनांक 04/01/2016 को आप की इस रचना का लिंक होगा…
    चर्चा मंच[कुलदीप ठाकुर द्वारा प्रस्तुत चर्चा] पर…
    आप भी आयेगा….
    धन्यवाद…

  3. Kavita Rawat says:

    सातवीें पंक्ति में तारीखें कर लें ..
    बहुत सुन्दर रचना
    ..नव वर्ष की हार्दिक मंगलकामनाएं!

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