fbpx

चित्रकारी Vs कलमकारी।

एक
जैसी लगती
तेरी चित्रकारी
और मेरी
कलमकारी।

लिखता
हूं तो एहसास
कैनवास हो जाता।
अल्फ़ाज़
मेरी कूंची बन जाती।

क्यूँ ना
कभी ऐसा हो,
तेरी स्केचिंग
के कैनवास पर,

मैं शब्दों के
गौहर सजा दूं।
और तू मेरी
ग़ज़ल पर
अपने रंगो का
टीका कर दे।

– मिश्रा राहुल

Share

You may also like...

2 Responses

  1. Dilbag Virk says:

    आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 07-01-2016 को चर्चा मंच पर चर्चा – 2214 में दिया जाएगा
    धन्यवाद

  2. सुन्दर अभिव्यक्ति ….

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *