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एक नज़रिया


सारे एक ही जैसे कितने……
….लेटे हैं एक बगल एक….
एक बड़ा ताबूत सा है…..
…..जिसके अगल-बगल
ऊंची-नीची पेंटिंग सजाई हैं….!!!

बचते ऐसे मानो….
……अगला नंबर उनका ना हो
सर के बल घसीटे जाते…..
….बड़ी बेरहमी से
खुरदुरी सतह पर…..!!!

चीख कर जल जाते….
….सारे अरमान एक ही बार मे
बिलकुल उसी….
….”माचिस की कांटी” जैसे…..!!!

रोते आज भी….
…..टूटे अगरबत्तियों के सीके….
अकेले ही पड़े हैं आज भी
…..उसी स्टैंड मे अटके…!!!

ऐश-ट्रे भी भंठी पड़ी….
….कितनों की आस्थियाँ से
जो आज भी वहीं…..
…..कौन ले जाये उन्हे
इस विएतनाम से उठा के….!!!

©खामोशियाँ-२०१४

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13 Responses

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति…!

    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज शुक्रवार (03-01-2014) को "एक कदम तुम्हारा हो एक कदम हमारा हो" (चर्चा मंच:अंक-1481) पर भी है!

    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।

    ईस्वीय सन् 2014 की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर…!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

  2. डॉ साहब धन्यवाद…एवं नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ …. !!!

  3. बहुत सुन्दर एहसास की अभिवक्ति !
    नया वर्ष २०१४ मंगलमय हो |सुख ,शांति ,स्वास्थ्यकर हो |कल्याणकारी हो |
    नई पोस्ट विचित्र प्रकृति
    नई पोस्ट नया वर्ष !

  4. धन्यवाद///बिलकुल आपके ब्लॉग के दर्शन करूंगा….!!

  5. बढ़िया रचना –
    आभार भाई-

  6. बहुत सुन्दर प्रस्तुति। । नव वर्ष की हार्दिक बधाई।

  7. धन्यवाद….स्वागतम….आभार….
    नव वर्ष की बधाई…..!!!

  8. पांडे जी स्वागतम…नव वर्ष खुशियों की सौगात लाए…. !!

  9. प्रतिभा जी स्वागत हैं हमारी खामोशियों की दुनियाँ मे…
    नव वर्ष मंगल मय…. आपको भी…!!!

  10. lori ali says:

    अन्दर तक सिहरा देने वाला ख्याल है
    बदन में झुरझुरी सी आ गयी
    एक बात तो है, नज़रिया आपका बड़ा पैना है
    क्या आपकी नज़्म का प्रयोग आपके नाम से अपने शोध कार्य में कर सकती हूँ ?

  11. बिल्कुल जरूर स्वागत है।

  12. अंतस को छुती रचना

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