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Icecream ज़िंदगी


ज़िंदगी
ice-cream के टुकड़े जैसी होती।
चाकू से काट, छोटे-बड़े
प्लेट मे सजाती रहती।

रंग बिरंगी,
अलग-अलग flavour।

मानो!!
तेवर ओढ़ रखे हो
vanila थोड़ा शांत,
strawberry बहुत गंभीर,
Butterscotch जरा गुस्सैल।

जुबान पर
ठहरती भी बस उतनी ही देर,
जीतने में इंसान मुखौटे बदलता।

©खामोशियाँ-२०१४ // मिश्रा राहुल

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10 Responses

  1. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन कब होगा इंसाफ – ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है … सादर आभार !

  2. क्या बात है।

  3. कल 09/जून/2014 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
    धन्यवाद !

  4. Misra Raahul says:

    धन्यवाद आशा जी।

  5. Misra Raahul says:

    पोस्ट को एहमियत देने लिए शुक्रिया।

  6. Misra Raahul says:

    यशवंत जी शुक्रिया आजकल नयी-पुरानी हलचल पे कम आना होता।

  7. Beautiful as always Mishra ji
    It is pleasure reading your poems.

  8. wow…sweet little icecream!!

  9. Misra Raahul says:

    खामोशियाँ पटल पर दिग्गजों का स्वागत है।

  10. Smita Singh says:

    amazing…..icecream

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