fbpx

इंतज़ार

मूर्तियों में भगवान खोजते है,
गलियों में इंसान खोजते है।

इंतज़ार करते है अकेले घर,
अपनों में मेहमान खोजते है।

पूछते कहाँ खैरियत अब तो,
रास्तों में सलाम खोजते है।

तोड़ते है दिल उम्मीदों का,
सपनों में जहान खोजते है।

टूट के बिखरती ज़िंदगी में,
किस्तों में अरमान खोजते है।

©खामोशियाँ-२०१४//मिश्रा राहुल
(डायरी के पन्नो में)(०२-अक्तूबर-२०१४)

Share

You may also like...

4 Responses

  1. कल 05/अक्तूबर/2014 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
    धन्यवाद !

  2. बहुत बढ़िया

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *