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लप्रेक १०

रेनॉल्ड्स 045 अब तो सफ़ेद से पीला पड़ गया हैं। करन नें उसकी नीली कैप भी बड़ी सम्हाल के रखी। पिछले बार आशीष से उसकी कट्टी भी इसी बात पर हुई थी। उसनें एक दिन के लिए पेन उधार मांगी थी। 

करन से दिल पे पत्थर रखकर उसे एक दिन खातिर अपना रेनॉल्ड्स 045 दिया था।
 

आजकल दूकान दूकान ढूंढता है, रिफिल मिलती नहीं। लोग मजाक भी
उड़ाते अमन बदल दे अपनी राम प्यारी।
 

अमन भी पलटवार करता। गिफ्ट कभी पुराना होता है क्या। कभी प्यार करोगे समझ जाओगे हुजूर।
 

– मिश्रा राहुल

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