fbpx

राज

इतने दिनों तक तो चुप था दिल,
चल उसे भी कुछ कहने देते हैं।

आ जाएगी अपने रिश्तों में चमक,
खुद को अंदर तक जलने देते हैं।

कब तक सहेज पाएंगे राज अपने,
खोल किताब उनको पढ़ने देते हैं।

एक अधूरी गज़ल पड़ी बरसों से,
चलो किसी को पूरा करने देते हैं।

चुप रहकर पत्थर हो गया था मैं,
हर रोज कुछ आदतें पलने देते हैं।

यूं ही नहीं बातों में ज़िक्र अपना,
दिल पर मीठा जुल्म सहने देते हैं।

– मिश्रा राहुल (13-मई-2018)
(©खामोशियाँ-2018) (डायरी के पन्नो से)

Share

You may also like...

2 Responses

  1. Just wish to say your article is as astounding. The clarity in your post is just great and i could assume you’re an expert on this subject. Fine with your permission allow me to grab your RSS feed to keep up to date with forthcoming post. Thanks a million and please carry on the gratifying work.| а

  2. g says:

    I am genuinely thankful to the holder of this web site who has shared
    this fantastic post at at this place.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *