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रक्षाबंधन

हर राखी,
कुछ कहती है।
रेशम के महीन
धागे मे लिपटी।

उम्मीद/विश्वास
की गांठ लगाए।

एक बगल एक
जलती नहीं दूसरे से,
समझदार है।

एहमियत समझती,
भावनाओं/संवेदनाओं का।

मन/मधुर/मिष्ठान
की मिस्री घोलती
बहन का प्यार।

आज/कल/हरबार।
______________
– मिश्रा राहुल
रक्षाबंधन – डायरी के पन्नो से
©खामोशियाँ-२०१४//०९-अगस्त-२०१४

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2 Responses

  1. बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति, रक्षा बंधन की हार्दिक शुभकामनायें।

  2. Anita says:

    रक्षा बंधन की शुभकामनायें..

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