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सर्द हवाएँ

अक्सर
जब ये
सर्द हवाएँ

खुली खिड़की
से आकर
मेरे बाल सहलाती।

तेरी याद
फिर से दुगनी
हो जाती।

– मिश्रा राहुल

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