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Tagged: आँख

अनसुलझी पहेली

पथरीली रास्तों पर की कहानी और है..
सिसकती आँखों में नमकीन पानी और है..!!

टूटा तारा गिरा है देख किसी देश में..
खोज जारी है पर उसकी मेहरबानी और है..!!

आग बुझ गयी मेरे ख्यालों को राख करके..
उड़ती हवाओं में उसकी रवानी और है..!!

कैसे कैसे बाजारों में आ गए देख..
उमड़ती बोलियों में उसकी बेजुवानी और है..!!

किस “आकृति” को बनाने बैठ गया है तू..
तेरी कूंची से लिपटी उसकी परेशानी और है..!!

बड़ा दिन से मानता हूँ तुझे ए मौला..
गुस्सा है तू और उसपर तेरी मनमानी और है..!!


©खामोशियाँ-२०१४  

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आज कुछ उखड़ी उखड़ी हैं वो…

आज कुछ उखड़ी उखड़ी हैं वो…

न आँखों मे ख्वाब कोई…
न ख्वाबों मे रुवाब कोई …!!

न प्यार मे कशिश कोई…
न कशिश मे बंदिश कोई…!!

न नज़्म मे साज कोई…
न साज मे आवाज कोई…!!

न मौसम की मदहोसी कोई…
न मदहोसी मे बेहोसी कोई…!!

आज कुछ उखड़ी उखड़ी हैं वो….

~खामोशियाँ©

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जिंदगी:एक भंवर….लेख…!!!

कभी कभी हम अपने अनुभवों के संसार में केवल एक अकेले नाविक भाति हवाओं से लड़ते रहते हैं…उस भ्रम रुपी संसार के क्रिया कलापों के रचनाकार हम स्वंय ही होते हैं…!!!
हम लाख मन्नते कर ले किसी अन्य को अपने उस संसार की ऊष्मा में जलाने में पर हम उन्हें
 उससे परिचित नहीं करा सकते….उसके दुःख, पीड़ा, ख़ुशी, भावनाएं केवल अपने दायरे तक ही नियत रहती हैं …हमारे अपने लिए होती हैं वो अजब दुनिया… दूसरों के लिए वह एक विचित्र अलग संसार जैसा हैं…वह उसके बारे में जान सकता है, पढ़ सकता है, सुन सकता है… परन्तु उसे महसूस कतई नहीं कर सकता…!!
ठीक ये बात उसी तरह होती जैसे हम छोटे थे … हमारे बाबूजी बताते थे की हम लाखो मंदाकिनियों में विलीन हैं और उनमे से सिर्फ एक मन्दाकिनी में हम रहते …. और सूरज चाँद धरती आकाश आग पानी…सब सब इस परिवेश तलक ही हैं..दूसरी दुनिया में कुछ भी नहीं …सिर्फ धुंध से धुधली तस्वीरे हैं …जो दिखती नहीं इन नाजुक आँखों से..!!!
आज पता चला शायद वो सही थे…!!

~खामोशियाँ©

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बादलों की एक्स-रे…!!!

झील मे झांक
कर…
मांघे सुलझा रहा…!!

बादलों की एक्स-रे
पर…
कैसे उतार रहा…!!

दिन तपती दुपहरी
से…
चेहरा बिगाड़ रहा…!!

गोरे होने खातिर
कितने…
क्रीम लगा रहा…!!!

निशा की सूरमा
चुराये…
आंखे पोत रहा…!!!

~खामोशियाँ©

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मौसम


निकल गए रास्तों मे तो बहक हम जाएंगे…
बदली हैं अभी शाम तक सितारे छा जाएंगे…!!!

कब से मुह बाए खड़ी सींप दरींचो पर..
बचाओ उन्हे या कौड़ियाल शुक्र मनाएंगे…!!!

बड़ी तेजी से खींचती धूप नयी कोपले…
पकड़ ले वरना लोग दिन मे ही खो जाएंगे…!!!

महफ़िलों मे जरा आंखो पे सजा लेना…
बर्जे पर दो-चार आँसू छोड़ जाएंगे…!!!

बड़ी उदास मन से हर रोज पूछते मेंढक…
आखिर बरसातों के मौसम कब तक आएंगे…!!

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अकेली सांझ…!!!

हर सांझ की तन्हाई जाने कितने सवाल अपने अन्दर बसाए रहती….थोड़ी दूर चलते हम…और शायद गली ही रूठ जाती हमसे…रास्ते ही ना होते आगे के…!!!

बड़ी अकेली बैठी शाम का दस्तूर हो गया ,
नजरें थी पास पर वो दिल से दूर हो गया .. !!

किसी चाह्दिवारी में सजे झूमरो जैसे,
वो चाँद भी हमारी पहुच से दूर हो गया .. !!
कितने ग़ज़ल दबे उन पीले किताबों में,
गुनाह किया कितने और वो बेकसूर हो गया .. !!
तनहाइयों ने छेड़ दी वो कशिश ज़िन्दगी में ,
मोहरा आएने में झाकने को मजबूर हो गया .. !!
एक अजब सी सवाल आँख मिजाते पूछती सुबह,
तेरा यार जो पास था वो कैसे दूर हो गया .. !!
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रात सोना भूल गयी…!!!

रात सोना भूल गयी…!!!

कहा सुनी हो गयी फलक पर..
सब चले गए मुह फुलाए हुए…!!

तारे कम ही लिपटे थे देख..
अब्र मफलर बांधे चल दिए…!!
क्या माजरा था जान न पाया…
चाँद भी लाइट बुझा सो गया…!!
बड़ी देर से आँखे झुकाये…
पड़ा रहा टूटी खाटोले पे…!!
पर इसी कसमकस में देख..
आज रात ही सोना भूल गयी…!!
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ख्वाब…!!!

आँख लगी थी अभी अभी अचानक..
पुतली की बीचो बीच फंसी रह गयी .. !!
कुछ खाली जगह में तह कर के..
भर गए ख्वाबों की जगमगाहट से .. !!
सन गयी चादर अब रोक न सकता ..
देख सूज तेरी गयी आँख फिर .. !!
उप्पर तक पहुच गए तेरे सपने ..
अब उठ जा तू कल देखना बाकी .. !!

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