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गमो का जन्मदिन…

एक खाली
पड़े मकान से
जाने कितनी बार बात हुई…

कई रात
दोनों साथ काटें
सिरहाने तक लगवाए साथ…

रात मे
दियासलाई मार के
कितने अँधेरों को भगाए साथ…

देख आगन
पर कैसे टॉर्च
मार दोनों की तलाशी ले रहा अब्र…

बयार भी
दरवाजे पर कुंडी
पकड़ झूलती नजर आ रही…

सम्मे चिपके
कान लगाए चाह
रहे सुनना हम लोगों की फूस-फूस…

अब खोल
भी दे देख दरीचों
तलक आ पहुचे जुगनू रोते रोते…

देख अब
कहा तू अकेला
सब तो हैं चल आज माना ही ले…

… गमो का जन्मदिन…

~खामोशियाँ©

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मेला…!!!

साझ बन सँवर
के तैयार…
तारे भी सेंट लगाए
बाहर खड़े …!!

अब्र ईस्त्री कर
रहा मठमैली कमीज…
मेला लगा
कुछ दूर फ़लक पे…!!

ओहह फटा था कुर्ता
अब्र का शायद…
अठन्नी गायब
कौन ले गया उसको…!!

बच्चे रो रहे
कोई मनाओ उन्हे…
सुबह होने से पहले
वरना कल ना आएंगे…!!

~खामोशियाँ©

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बारिश

बड़ी बेदर्दी से रोता फ़लक…
उसपे फोटो खीचते ये अब्र…!!!

बड़ी दिनों से जमाकर रखी…
बर्फीली गिट्टी मार रहा धरा को…!!!

उधड गए महीन टाँके उसके…
सुबह ही लगवाया था जिन्हें..!!!

अब कल के अखबार मे देखना…
कहाँ कितना खून टपकाया…!!!

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चाँद का जन्मदिन…

जन्मदिन था चाँद का…सब आये थे…पर फिर भी मुह फुलाए खड़ा था…चाँद ऐसा क्यूँ…!!

आज तो जन्मदिन था चाँद का..
सितारों से सजी थी महफ़िल भी…!!

बिजली कड़क रही की फलक पे..
गिरे सहमे चाँद के बाजुओ में…!!

हवाए फूंक रही रंग बिरंगे गुब्बारे…
सितारे भी कतार में खड़े झालर बने…!!

रुका हैं चाँद किसी और के लिए…
नहीं आ पाएगा वो काट केक तू…

बड़ी सर्दी पड गयी हैं आज देख…
धरा ने ओढ़ लिया अब्रो का कम्बल…!!

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रात सोना भूल गयी…!!!

रात सोना भूल गयी…!!!

कहा सुनी हो गयी फलक पर..
सब चले गए मुह फुलाए हुए…!!

तारे कम ही लिपटे थे देख..
अब्र मफलर बांधे चल दिए…!!
क्या माजरा था जान न पाया…
चाँद भी लाइट बुझा सो गया…!!
बड़ी देर से आँखे झुकाये…
पड़ा रहा टूटी खाटोले पे…!!
पर इसी कसमकस में देख..
आज रात ही सोना भूल गयी…!!
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यादों के रुमाल..???

गोरखपुर में बारिश हो रही सोचा बड़ी रोज से कलम शांत हैं आज उसे भी मौका दूँ वरना नाराज हो जाएगा … अगर सोचिये आँख मिचौली हो रही हो आकाश में इस समय तो क्या मंजर हो आहा सोच के मजा आ जाता…!!!


अभी निशा अपने शबाब पर थी कि
लग गई नजर कुछ लफंगे अब्रों की..!!

गरज रहे उसके अगल बगल जैसे..
बड़ी देर से सहमी सी बैठ हैं डर के..!!

सितारा भी गिनती गिन रहा आँख मूंदे..
बादलों के साए में छुपा बैठा चाँद…!!

जरा देख हट गयी तेरे ऊपर से कवर
अब जा टिप मार दे वरना हार जाएगा..!!

लो रोने लगा चाँद हार के अब तो..
रोएंगे बादल भी उसे देख कर..!!

अब कौन ले आये यादों के रुमाल…???

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ऋतू की कसमकस…!!


हमारे पुरानी डायरी पलटी तो देखा कुछ शब्द लिपटे थे … बंधे एक दूजे से .. याद नहीं कब किस समय लिखा था पर … फिर भी पढ़ लीजिये .. शायद अच्छा लगे..!!

ऋतू की बाते कुछ हमें भी जमने लगी ..
हम हटे वहा से की बर्फ पिघलने लगी ..!!

छलक जाते है अब इन मैकासों से पैमाने ..
कभी तो धुप थी अब बदरी होने लगी ..!!

कयास लगा रहे थे कि बारिश भी होने लगी ..
लो भीग गए हम अब क्या हवा बहने लगी ..!!

सूखे पत्ते जैसे सिकोड़ कर रख लिया..
कि फिर धूप सर तलक आने लगी..!!

इस कसमकस से उबरने लिए देख ..
अलाव जलाया था कि तूफ़ान बुझाने लगी ..!!

कुछ हद तक छुपाया अपनी हथेलियों से ..
कि अब्र अपनी अन्सको से भिगोने लगी ..!!

क्या हैं क्या ये ऋतू की फेर ए राहुल ..
कभी गर्मी थी वह पर अब सर्दी जकड़ने लगी ..!!

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बूढा चाँद…!!!

बूढा चाँद फिर चला आया दुधिया टोर्च जकडे..
रौशनी छनती आ रही कुछ दरीचे पकडे ..!!

एक अजब झिगोला पास अपने देख ..
अब्रो से खेलता रहता करते हज़ारों नखडे ..!!

सितारों की मधुशाला में शर्माता रहता यूँ ..
जैसे हो छोटा बच्चा हाथों में लम्चुस जकडे ..!!

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सूरज की गाड़ी

सेहर न आई काफी देर से जागे हम भी ..
कोई बताये कितनी लेट हैं सूरज की गाडी ..!! 
जाने कितनी ओस टपकाती अब्रों की छतरी ..
हर बूँद जला जाती कितने यादों की फुलझड़ी ..!!
मत हटा बुझी अंगीठियों को यहाँ से ..
अब भी जल उठाती हैं बुझी राखों की तस्तरी ..!!
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