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उम्मीदों का भूकंप

हर शब
कई ख्वाब टूटते।
हर पल
यादों की इमारत ढहती।

उम्र भर की कमाई,
एक ही
पल में बिखर जाती।

दबे रहते
मलबे तले
लाखों एहसास।

तड़प कर
दम तोड़ते,
जाने कितनी
फरियादें।

ऐसे तो
हर रोज ही
आता है
उम्मीदों का भूकंप।

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