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ज़िंदगी का नज़रिया


पल मे ही तो बदल लेती नज़रिया आकने का…..
वरना खूबसूरती की कबतक सागिर्द होगी मोहब्बत …..!!

रोज़ ही तो मिल जाते चेहरे नए “सिकन” ओढ़े….
वरना सादगी की इम्तिहान कबतक पास होगी फितरत….!!!

कुछ सीख ले वक़्त रहते तू भी इस ज़िंदगी से….
वरना ऐसे मे अकेले कबतक बहकी होगी शिद्दत….!!

कुछ लकीरें उधार हो जाते खुद-ब-खुद प्यार के…..
वरना मौत के चौराहे कबतक तड़पी होगी किस्मत….!!!

©खामोशियाँ-२०१३

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3 Responses

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति…!

    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज शनिवार (28-12-13) को "जिन पे असर नहीं होता" : चर्चा मंच : चर्चा अंक : 1475 में "मयंक का कोना" पर भी है!

    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।

    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर…!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

  2. Smita Singh says:

    सुन्दर भाव

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