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जिंदगी की पतंग


Kites…Different Colors … Distinguishing the Different Character of them … 
Expectation flying high string winded up to it … 
Why not us to free our soul and just vapourise enough to touch those free clouds in sky … Giving nudge to the kite as it was their kid playing under Blue Park … !!


पतंग टंगे हैं फलक से
मानो डोर बंधी हो
बादल से लटक रहे…!!!

मन हो रहा
उचक के छु लूँ उन्हें…
पर खेल बिगड़ जाएगा इनका…!!

हाँ लाल को लाल से
काट रहे
मंझे भी दाँत निकाले टहल रहे..!!

जिसे पाए काट खाए
और..
गिरा दे फिर एक नए उड़ान खातिर..!!

मकर संक्रांति और खिचड़ी की हार्दिक बधाईयाँ …!!

©खामोशियाँ-२०१४

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11 Responses

  1. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति बुधवारीयचर्चा मंच पर ।।

  2. जिसे पाए काट खाए
    और..
    गिरा दे फिर एक नए उड़ान खातिर..!!
    वाह … लेखन का यह बेहतरीन अंदाज … राहुल भाई

  3. ये जीवन का खेल है … आगे जाने के लिए दूसरे को सभी काटते हैं …
    मकर संक्रांति की शुभकामनायें …

  4. आज के दौर के सच को अभिव्यक्त करती कविता… बेहतरीन अंदाज …
    मकर संक्रांति की शुभकामनायें …

  5. Archana says:

    बस! भरो ऊँची उड़ानें
    एक हो मकसद ,सबकी जानें ….

  6. बुआजी हम धन्य हो गए आप पधारे…..!!!

  7. कल 16/01/2014 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
    धन्यवाद !

  8. Ankur Jain says:

    आपको भी अनंत बधाईयां…सुंदर प्रस्तुति।।।

  9. मकर संक्रान्ति की शुभकामनाएं !
    नई पोस्ट हम तुम…..,पानी का बूंद !
    नई पोस्ट बोलती तस्वीरें !

  10. achha composition hai par english wale mein kuchh gadbad dikh rahi hai .. (hope u wont mind it)

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